रिश्तों में संघर्ष को कैसे सुलझाएं (भाग 2)
संघर्ष के दौरान यह समझना ज़रूरी है कि हम जैसे वाइब्रेशन क्रिएट करते हैं, वैसी ही एनर्जी हमें वापस मिलती है। इसे “लॉ ऑफ कॉज एंड इफेक्ट” कहा जाता है। सूक्ष्म स्तर पर, हम अपनी दृष्टिकोण के अनुसार ऊर्जा का संचार करते हैं और भौतिक स्तर पर, अपने व्यवहार के अनुसार। हम जो भी सूक्ष्म और भौतिक स्तर पर प्रसारित करते हैं, वह हमें उसी रूप में वापस मिलता है; जब तक कि दूसरा व्यक्ति अधिक समझदार न हो और नकारात्मक ऊर्जा लौटाने के बजाय सकारात्मक दृष्टिकोण और व्यवहार अपनाए। इस तरह वह व्यक्ति हमें हमारी अपनी नकारात्मकता से मुक्त करने में सहायता करता है, न कि हम पर निर्भरता पैदा करता है।
अक्सर, दो व्यक्तियों के बीच संघर्ष इसलिए होता है क्योंकि हमें उस रिश्ते में वह परिणाम नहीं मिलता, जिसकी हमें अपेक्षा होती है। हम किसी विशेष परिणाम को पाने की इच्छा में फंसे रहते हैं और अपनी खुशी को उस पर निर्भर कर लेते हैं। जब हमें यह परिणाम नहीं मिलता, तो हम गलत तरीका अपनाते हैं; संघर्ष पैदा करते हैं, खुद को पीड़ित मानते हैं, दूसरों को दोष देते हैं और अपने दर्द को उन पर थोपते हैं। यह सब इस विश्वास के कारण होता है कि दूसरे हमें खुश करते हैं या दुखी करते हैं। यह एक गलत धारणा है। क्योंकि
जब आपकी खुशी आपकी अपेक्षाओं के पूरा होने पर निर्भर होती है, तो लगातार खुश रहना मुश्किल हो जाता है।
अक्सर हमारी ये अपेक्षाएं, छुपी हुई इच्छाएं हैं, और जहां इच्छाएं होती हैं, वहां भय होता है; जो हम चाहते हैं, उसे न पाने का भय। जब वह नहीं मिलता, तो हम दुखी हो जाते हैं और इस प्रकार हम खुशी को अपने से दूर रखते हैं। शांतिपूर्ण रिश्तों का लक्ष्य रखना अच्छा है, लेकिन यदि यह लक्ष्य पूरा नहीं होता या इसे पूरा होने में समय लगता है, तो भी अपनी खुशहाली को न खोएं। आपकी खुशी, दूसरों से अपनी अपेक्षाओं को पूरा करने की बाहरी उपलब्धि से कहीं अधिक मूल्यवान है।
आज का अभ्यास
आज स्वयं को याद दिलाएं कि मेरी खुशी किसी परिणाम पर नहीं, बल्कि मेरी आंतरिक कॉन्शियसनेस और दृष्टिकोण पर आधारित है।
आज अभ्यास करूँगा/करूँगी
